केंद्र सरकार ने 5 जनवरी को ही 162 ऑक्सीजन प्लांट (पीएसए) लगाने के लिए 32 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को पीएम केयर फंड से 201.58 करोड़ रुपए का आवंटन कर दिया था उसके बावजूद राज्य सरकारों ने ऑक्सीजन प्लांट लगाना जरूरी नहीं समझा। केंद्र सरकार जनवरी से ही राज्यों को कोरोना की दूसरी वेव के प्रति चेतावनी दे रही है, लेकिन मोदी द्वेष (कहीं मोदी और लोकप्रिय न हो जाए) के चलते राज्य सरकारों ने क्या किया ? कुछ नहीं!

आप पूछते है केंद्र सरकार क्या कर रही है ? केंद्र सरकार तो हर संभव प्रयास कर रही है पिछले साल से कोरोना महामारी को रोकने के लिए। लेकिन संविधान में राज्य सरकारों को भी जनकल्याण का दायित्व सौंपा गया है, संविधान के इसी प्रावधान के अनुसार केंद्र सरकार राज्यों के सहयोग के बिना जनकल्याण का कोई काम नही कर सकती है।

जब से मोदी सरकार बनी सारे विपक्ष कुशाशित राज्य मोदी द्वेष के चलते प्रदेश की जनता का अहित कर रहे है। राहुल गांधी प्रियंका गांधी समेत सारी कांग्रेस और अर्बन नक्सलियों का गैंग इस आपदा में अवसर तलाश रहे है और सोशल मीडिया के जरिए मोदी/भाजपा सरकार के विरुद्ध झूठ और भ्रम की स्थिति फैला रहे है।

बंगाल की मुख्यमंत्री तो कोविड मीटिंग में शामिल ही नही होती है, बंगाल में किसानों को केंद्र सरकार की योजना का लाभ नहीं दिया जाता है, बंगाल में नमामि गंगे के तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए जमीन तक नही दी जाती है, बंगाल की गरीब जनता को आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं दिया जाता। ये सब कुछ सिर्फ और सिर्फ मोदी द्वेष के चलते एक राज्य सरकार द्वारा अपने प्रदेश की जनता के साथ किया गया अन्याय है।

योजनाओं में सारा पैसा केंद्र सरकार दे, कोरोना से जनता की सुरक्षा केंद्र सरकार करे.. तो राज्य सरकारें क्यों बनी है फिर ?

दिल्ली के मालिक के झूठे और खोखले दावों के विज्ञापन अब तो यत्र तत्र सर्वत्र है। इतना पैसा विज्ञापन पर खर्च किया है अगर इसका आधा दिल्ली में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने पर खर्च किया होता तो आज ऑक्सीजन की कमी से लोगों को मरना न पड़ता।

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस निर्लज्ज धूर्त व्यक्ति को फटकार लगाई है और पूछा कि जब केंद्र सरकार ने 8 ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए दिल्ली सरकार को पहले ही पैसा दे दिया था तो अब तक वो प्लांट लगे क्यों नहीं ? जवाब देते नहीं बना। और इसको चाहिए पूर्ण राज्य का दर्जा।

सारा ठीकरा केंद्र पर फोड़कर राज्य सरकारें अपने दायित्व से पतली गली पकड़कर बचने का प्रयास कर रही है। जबकि केंद्र सरकार लगातार देश को इस परिस्थिति से निकालने का प्रयास कर रही है,,!!!!

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